कारगिल विजय दिवस को याद करना : अर्पित वर्मा आई ए सो

कारगिल विजय दिवस को याद करना : अर्पित वर्मा आई ए सो

कारगिल विजय दिवस स्वतंत्र भारत के सभी देशवासियों के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण दिवस है।

भारत में प्रत्येक वर्ष 26 जुलाई को यह दिवस मनाया जाता है।

इस दिन भारत और पाकिस्तान की सेनाओं के बीच वर्ष 1999 में कारगिल युद्ध हुआ था जो लगभग 60 दिनों तक चला और 26 जुलाई के दिन उसका अंत हुआ और इसमें भारत विजय हुआ। कारगिल विजय दिवस युद्ध में शहीद हुए भारतीय जवानों के सम्मान हेतु यह दिवस मनाया जाता है।

श्री अर्पित वर्मा IAS जी के शब्दों में ...

"मैं जला हुआ राख नहीं, अमर दीप हूं जो मिट गया वतन पर, मैं वह शहीद हूं" #KargilVijayDiwas के अवसर पर देश की आन,बान,शान के लिए प्राणों की आहुति देने वाले अमर रणबांकुरों को शत शत नमन! 22 साल पहले आज के ही दिन भारतीय सेना ने दुश्मनों को धूल चटाकर कारगिल की चोटी पर तिरंगा फहराया था।

इतिहास

1971 के भारत-पाक युद्ध के बाद भी कई दिन सैन्य संघर्ष होता रहा। इतिहास के मुताबित दोनों देशों द्वारा परमाणु परीक्षण के कारण तनाव और बढ़ गया था। स्थिति को शांत करने के लिए दोनों देशों ने फरवरी 1999 में लाहौर में घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर किए।

जिसमें कश्मीर मुद्दे को द्विपक्षीय वार्ता द्वारा शांतिपूर्ण ढंग से हल करने का वादा किया गया था। लेकिन पाकिस्तान ने अपने सैनिकों और अर्ध-सैनिक बलों को छिपाकर नियंत्रण रेखा के पार भेजने लगा और इस घुसपैठ का नाम "ऑपरेशन बद्र" रखा था। इसका मुख्य उद्देश्य कश्मीर और लद्दाख के बीच की कड़ी को तोड़ना और भारतीय सेना को सियाचिन ग्लेशियर से हटाना था। पाकिस्तान यह भी मानता है कि इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार के तनाव से कश्मीर मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बनाने में मदद मिलेगी।

प्रारम्भ में इसे घुसपैठ मान लिया था और दावा किया गया कि इन्हें कुछ ही दिनों में बाहर कर दिया जाएगा। लेकिन नियंत्रण रेखा में खोज के बाद और इन घुसपैठियों के नियोजित रणनीति में अंतर का पता चलने के बाद भारतीय सेना को अहसास हो गया कि हमले की योजना बहुत बड़े पैमाने पर किया गया है।

इसके बाद भारत सरकार ने ऑपरेशन विजय नाम से 2,00,000 सैनिकों को भेजा। यह युद्ध आधिकारिक रूप से 26 जुलाई 1999 को समाप्त हुआ। इस युद्ध के दौरान 550 सैनिकों ने अपने जीवन का बलिदान दिया और 1400 के करीब घायल हुए थे ।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'मन की बात' कार्यक्रम के जरिए 26 जुलाई को कारगिल युद्ध के वीरों को याद किया और कहा कि पाकिस्तान ने हमारी पीठ में छूरा खोंपने का प्रयास किया था, लेकिन फिर दुनिया ने हमारे सैनिकों और भारत की ताकत को देखा. प्रधानमंत्री ने कहा कि आज ही के दिन 21 साल पहले हमारी सेना ने भारत की जीत का झंडा फहराया था. उन्होंने कहा कि कारगिल का युद्ध जिस परिस्थितियों में हुआ था उसे भारत कभी नहीं भूल सकता है.